न्यूज 21भारत लखनऊ
ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद यूपी में भी शोक संवेदनाओं का सिलसिला चल रहा है, ऐसे में खुमैनी की एक ऐतिहासिक और दिलचस्प कड़ी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से जुड़ती नजर आ रही है।बहुत कम लोग जानते होंगे कि ईरान के सर्वोच्च लीडर अयातुल्ला अली खुमैनी का पैतृक रिश्ता बाराबंकी के किंतूर गांव से है।
दरअसल, अयातुल्ला अली खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्म उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में बाराबंकी के पास किंतूर गांव में हुआ था। उन्होंने बाद में भारत को अलविदा कहा और ईरान की ओर रुख किया।यात्रा के दौरान वे इराक के नजफ गए और अंततः 1834 के आसपास ईरान के खोमेन शहर में बस गए। वहीं से उनके परिवार की कहानी ईरान की राजनीति और क्रांति तक पहुंची।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमद मुसावी हिंदी के पिता दीन अली शाह मिडिल ईस्ट से भारत आए थे और फिर बाराबंकी में बसे। अहमद मुसावी ने अपने नाम के साथ ”हिंदी” जोड़कर भारत से अपने जुड़ाव को हमेशा जिंदा रखा।उन्हें इस्लामी पुनरुत्थान का समर्थक माना जाता है।
1869 में उनका निधन हुआ और उन्हें कर्बला में दफनाया गया।उनके पोते अयातुल्ला खुमैनी ने आगे चलकर 1979 में ईरानी इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया और ईरान को एक धर्मतंत्र में बदल दिया।
ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ
खुमैनी देश के पहले सर्वोच्च नेता बने और आज भी ईरानी सत्ता की नींव उन्हीं के विचारों पर टिकी है….
Author: Adv Vinod Kumar
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