चोरी की अफवाहों से दहशत में अमेठी, रातभर पहरा दे रहे ग्रामीण

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न्यूज 21भारत अमेठी

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बीते कुछ दिनों से ड्रोन देखे जाने की चर्चाओं के बाद अब चोरी की अफवाहों ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि गांव-गांव के लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। खेत-खलिहान से लेकर गांव की गलियों तक, हर ओर चौकसी बढ़ गई है। अफवाहों का असर यह है कि संदिग्ध नजर आने वाले किसी भी व्यक्ति को ग्रामीण पकड़ लेते हैं और कई मामलों में पिटाई तक कर देते हैं।

संदिग्ध युवक को पकड़ा

बीती रात भाले सुल्तान शहीद स्मारक थाना क्षेत्र के नामदासपुर नेशनल हाइवे पर ग्रामीणों ने एक संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। बताया जाता है कि वह युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था और सड़क किनारे भटक रहा था। ग्रामीणों ने पहले उसे रोककर पूछताछ की और शक होने पर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने पुष्टि की कि युवक का आपराधिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।

अफवाहों से बढ़ रही परेशानी

गांवों में लगातार इस तरह की चर्चाएं हो रही हैं कि बाहरी लोग चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए घूम रहे हैं। कई जगह यह भी कहा जा रहा है कि चोरी के इरादे से टोही की जा रही है। इन अफवाहों के चलते लोग न तो ठीक से सो पा रहे हैं और न ही सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। दिनभर खेतों में मेहनत करने वाले किसान रात को गांव की गलियों और सड़कों पर पहरा देते नजर आ रहे हैं।

पुलिस की अपील

अमेठी पुलिस ने साफ किया है कि अब तक जांच में चोरी से जुड़ा कोई संगठित गिरोह सामने नहीं आया है। पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। साथ ही, अधिकारियों का कहना है कि गांव-गांव में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत थाने पर दें, लेकिन अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाएं।

ग्रामीणों में दहशत

नामदासपुर के निवासी एक ग्रामीण ने बताया, “रोज रात को अलग-अलग टोलियां बनाकर हम लोग गश्त कर रहे हैं। डर तो है, लेकिन अब घर और गांव की सुरक्षा भी जरूरी है।” वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि लगातार फैली चर्चाओं से महिलाएं और बच्चे भी डरे हुए हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों तक को परिवार वाले अकेले भेजने से हिचक रहे हैं।

अफवाहों के सामाजिक दुष्प्रभाव

बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करती हैं। कई बार निर्दोष लोग भी इसका शिकार हो जाते हैं। बीती रात पकड़े गए युवक का मामला इसका उदाहरण है, जिसे ग्रामीणों ने चोर समझकर पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ निकला।

प्रशासन की रणनीति

पुलिस के साथ-साथ प्रशासन ने भी अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए रणनीति तैयार की है। ग्राम प्रधानों और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांवों में बैठक कर लोगों को समझाएं। साथ ही, सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाली या अफवाह भरी पोस्ट डालने वालों पर नजर रखी जा रही है।

निष्कर्ष

अमेठी जिले में चोरी की अफवाहों ने लोगों की नींद छीन ली है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन लगातार सक्रिय है और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। लेकिन तब तक जब तक अफवाहों का दौर थमेगा नहीं, तब तक ग्रामीणों की चौकसी और डर बरकरार रहने की संभावना है।

ब्यूरो रिपोर्ट

Adv Vinod Kumar
Author: Adv Vinod Kumar

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