न्यूज 21भारत सुल्तानपुर
सरकारी फाइलों एवं गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच पर उठे गंभीर सवाल…!
पारदर्शिता और गोपनीयता पर संकट…
सुल्तानपुर तहसील क्षेत्र में इन दिनों लेखपाल कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई हल्कों में लेखपालों के साथ बैठने वाले तथाकथित “प्राइवेट मुंशी” ही सरकारी कामकाज का संचालन कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी फाइलों को देखना, दस्तावेजों की एंट्री करना, आवेदकों से बातचीत करना और यहां तक कि काम कराने के लिए दलालों से संपर्क तक — ये सभी कार्य निजी व्यक्ति के रूप में तैनात प्राइवेट मुंशी ही करते नजर आ रहे हैं।
“लेखपाल नही,पहले मुंशी से मिलिए, फिर होगा काम”
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए सीधे लेखपाल से मिलने का अवसर कम ही मिलता है। अधिकांश मामलों में पहले प्राइवेट मुंशी से संपर्क करना पड़ता है,उनको पेशगी देनी पड़ती है । जिसके बाद ही काम की फाइल आगे बढ़ती है। इससे आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है और सरकारी प्रक्रिया की निष्पक्षता और उसकी गोपनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कानूनी पहलू पर उठे सवाल.
कानून के जानकारों का मानना है कि सरकारी अभिलेखों और गोपनीय दस्तावेजों तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हो सकता है। यदि कोई बाहरी या निजी व्यक्ति किसी सरकारी फाइलों को संभाल रहे हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है,बल्कि भविष्य में भ्रष्टाचार और दस्तावेजों की गोपनीयता भंग होने का खतरा भी पैदा करता है।
सबसे बड़े सवाल…?
1-क्या प्राइवेट मुंशी को सरकारी कार्य करने की कोई वैधानिक अनुमति है?
यदि नहीं, तो यह व्यवस्था अब तक कैसे चल रही है?
2-क्या इसपर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
3-इस मामले की जानकारी यदि उच्चाधिकारियों को है,तो इसपर रोक या प्राइवेट मुंशियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
प्रशासन से जनता की अपेक्षा.
जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। लेखपाल कार्यालयों में कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए यदि आवश्यक हो तो जांच बैठाई जानी चाहिए, ताकि आम जनता का विश्वास बहाल हो सके।
ब्यूरो रिपोर्ट सुल्तानपुर
Author: Adv Vinod Kumar
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