न्यूज 21भारत अमेठी
संकर लौकी से अमेठी चौंकी, बैजनाथ की बमबम।
मचान में लौकी का उत्पादन का हासिल किया नया मुकाम।
ड्रिप सिंचाई से अमेठी के किसान ने संकर लौकी से कमाया लाखों का मुनाफा।
“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना बनी वरदान, 0.50 हेक्टेयर में 200 कुंतल लौकी का उत्पादन।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने जंगलरामनगर के प्रगतिशील कृषक बैजनाथ मौर्या।
अमेठी, 30 जनवरी। जिले के एक साधारण किसान ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी किस्मत बदल ली है। उनकी संकर लौकी की उपज और आय से अमेठी चौंक उठी है। विकासखंड अमेठी के ग्राम जंगलरामनगर के प्रगतिशील किसान बैजनाथ मौर्या की बमबम हो रही है। मात्र 0.50 हेक्टेयर (यानी आधा हेक्टेयर) भूमि पर संकर लौकी की खेती करके न केवल उच्च उत्पादन हासिल किया, बल्कि लगभग 3.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा कर दिखाया है। बैजनाथ की सफलता से अन्य किसानों में भी उत्साह है। पहले जहां किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, अब वे आधुनिक तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं।

यह सफलता उत्तर प्रदेश सरकार की “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कृषि-केंद्रित दृष्टिकोण का जीता-जागता उदाहरण है। बैजनाथ मौर्या ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उपलब्ध सब्सिडी और तकनीकी सहायता का लाभ उठाते हुए अपने खेत में मचान प्रणाली (ट्रेलिस या बाड़ा सिस्टम) पर संकर लौकी की खेती शुरू की। साथ ही उन्होंने ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) पद्धति स्थापित की, जो “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना का मुख्य हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य है “प्रति बूंद अधिक फसल” अर्थात् कम पानी में अधिक उत्पादन। ड्रिप सिंचाई से पानी की बर्बादी रुकती है, पौधों को सीधे जड़ों तक पोषक तत्व और नमी मिलती है, तथा फसल स्वस्थ और अधिक उपजाऊ रहती है।
20 टन उत्पादन करके दिखाया
जायद मौसम (गर्मियों) में बैजनाथ ने संकर लौकी की उच्च गुणवत्ता वाली किस्म लगाई, जिससे उनके खेत से लगभग 200 कुंतल (20 टन) उत्पादन हुआ। बाजार में संकर लौकी की अच्छी कीमत मिलने से मुख्य फसल से ही पर्याप्त आय हुई। लेकिन वह यहीं नहीं रुके। उन्होंने इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती) का सहारा लिया। संकर लौकी के साथ ही मचान के नीचे भिंडी, धनिया और मूली की फसलें उगाईं, जिससे अतिरिक्त आमदनी हुई। इसके बाद रबी मौसम में उन्होंने टमाटर, बैंगन, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां उगाकर साल भर सब्जी उत्पादन का सिलसिला जारी रखा।

योजना को अपमाने से उत्पादन हो गया दोगुना
यह नवाचार अमेठी जिले में डीएम और सीडीओ के मार्गदर्शन में चल रही नवाचारी खेती की मुहिम का हिस्सा है। बैजनाथ मौर्या बताते हैं कि पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने पर पानी की कमी, कीट-रोग और कम उत्पादन जैसी समस्याएं रहती थीं। लेकिन ड्रिप सिंचाई और मचान प्रणाली अपनाने के बाद उत्पादन दोगुना से अधिक हो गया, जबकि पानी की खपत काफी कम हुई। “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना ने उन्हें सब्सिडी पर ड्रिप सिस्टम लगवाने में मदद की, जिससे लागत कम हुई और लाभ अधिक।
परियोजना और नवाचार से दिखाया बड़ा बदलाव
मचान पर लौकी जैसी बेल वाली फसलें लगाने से भूमि का बेहतर उपयोग होता है तथा इंटरक्रॉपिंग से अतिरिक्त आय मिलती है। यह तरीका छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि कम भूमि में अधिक कमाई संभव हो जाती है। बैजनाथ मौर्या जैसे किसान इन योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं। उनकी कहानी प्रेरणादायक है। यह बताती है कि मेहनत, सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और नवाचार से छोटे स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। आज बैजनाथ अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। वे कहते हैं। किसी भी किसान को हताश नहीं होना चाहिए। थोड़ी सी तकनीक और योजना का लाभ उठाकर हम अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।

मिसाल बन चुका है बैजनाथ
जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि बैजनाथ मौर्या की यह सफलता उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई उम्मीद जगाती है। यह साबित करती है कि आधुनिक खेती, जल संरक्षण और मिश्रित फसल प्रणाली से किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि लाखों की कमाई भी कर सकते हैं। जंगलरामनगर का यह प्रगतिशील किसान अब पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन चुका है।
करुणा शंकर वर्मा की रिपोर्ट
Author: Adv Vinod Kumar
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