न्यूज 21भारत लखनऊ
देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू हुए यूजीसी के नए रेगुलेशन ने अब सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ को जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसका विरोध भी शुरू हो चुका है। यूपी चुनाव 2027 से पहले इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू किया गया नया रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रभावी हो चुका है। इस नियम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकना और समानता का वातावरण तैयार करना है।
यूजीसी का दावा है कि यह कदम छात्रों को सुरक्षित और समान अवसर प्रदान करेगा। हालांकि, देश के कुछ संगठनों और अगड़ी जातियों से जुड़े वर्गों ने इस नियम को पक्षपातपूर्ण बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।उत्तर प्रदेश में भी इस नियम को सभी शैक्षणिक संस्थानों में लागू कर दिया गया है। चुनावी वर्ष नजदीक होने के कारण अब यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है। वहीं पूरे प्रदेश में भी इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कुल मिलाकर, समानता के नाम पर लाया गया यह नया नियम अब समर्थन और विरोध के बीच घिरता नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या यह रेगुलेशन वास्तव में भेदभाव खत्म करेगा या नई सामाजिक खाई को जन्म देगा। यूपी चुनाव 2027 से पहले इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाने लगी है।
ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ
Author: Adv Vinod Kumar
न्यूज 21 भारत




