सत्संग से ही विवेक की उत्पत्ति होती है- आचार्य राघवाचार्य महाराज 

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न्यूज 21भारत प्रयागराज

होलागढ़ ( प्रयागराज ) विकास खंड होलागढ चांटी गांव में मंगला प्रसाद शुक्ल के यहां श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन में कथा व्यास राघवाचार्य महाराज ने कहा कि महर्षि कर्दम भगवान ब्रह्मा के छाया से प्रकट हुए थे।सरस्वती के तट पर दस हजार वर्ष तक तप किए थे।ब्रह्मा जी तपस्या से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा ।कर्दम जी ने अपने समान गुणधर्म और गृहस्थ धर्म का पालन करने वाली विवाह के लिए कन्या मांगी। ऐसे में एक राजा की लडकी उनके ज्ञान की परीक्षा में पास हुई।जिसके साथ विवाह सम्पन्न हुआ। कथा व्यास स्वामी आचार्य राघवाचार्य जी महराज ने बताया कि मनु स्तरूपा,स्वेत वाराह भगवान सहित कई कथा का प्रसंग सुनाया। पडित्य कर्म करने वालो को ज्ञान दिया कि पंडिताई यजमान के कल्याण और अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए होनी चाहिए।जो आजकल इससे इतर हो गई है।मुख्य यजमान पूर्व प्रधान मंगला प्रसाद शुक्ल सपत्नीक और माता प्रसाद शुक्ल कथा में सम्मिलित होलागढ़ के पूर्व बीडीओ राज कुमार गौतम,प्रधान पति चंद्र मणि शुक्ल,एडीओ आईएसबी मयूरेश त्रिपाठी,प्रधान प्रतिनिधि हर्ष मणि शुक्ल,अंकित शुक्ल,पवन शुक्ल मुकेश मिश्रा सुनील तिवारी रूद्र सी देवमणि शुक्ला अशोक शुक्ला पिंटू शुक्ला प्रभाकर नाथ शुक्ला सहित अधिक संख्या में श्रोतागण भागवत पंडाल में मौजूद रहे।

राकेश यादव की रिपोर्ट

Adv Vinod Kumar
Author: Adv Vinod Kumar

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