न्यूज 21भारत अयोध्या
अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह, जिन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में विवादित इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल पैदा की थी, अब गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। मंगलवार रात लगभग 9 बजे पुलिस उन्हें लेकर गई और सूत्रों के अनुसार उन्हें परिवार के पास लखनऊ भेजा गया है। संपर्क करने की कोशिशों के बावजूद उनका फोन स्वीच ऑफ रहा।
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का गंभीर आरोप-
48 वर्षीय प्रशांत कुमार पर सबसे बड़ा आरोप उनके सगे भाई विश्वजीत सिंह ने लगाया है। उनका कहना है कि प्रशांत को दिव्यांग कोटे से नौकरी मिली थी, लेकिन उनका दिव्यांगता प्रमाणपत्र फर्जी है। यह मामला अब शासन स्तर तक पहुंच चुका है। प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान ने राज्यकर आयुक्त नितिन बंसल से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
आयुक्त कार्यालय ने बताया कि प्रशांत के खिलाफ 2020–21 से ही जांच लंबित है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट न मिलने की वजह से जांच आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब शासन ने अयोध्या समेत प्रशांत की पोस्टिंग वाले सभी जिलों से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। उनके गृह जिले मऊ से भी रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट तलब की गई है। आरोप सही मिलने पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
8 लाख रुपये की वसूली का आरोप—कपड़ा व्यापारी की याचिका-
अयोध्या के कपड़ा व्यवसायी लक्ष्मण दास ने प्रशांत कुमार पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। व्यापारी का कहना है कि 2 अप्रैल को प्रशांत अपनी टीम के साथ दुकान पर छापा मारने आए थे।
सर्वे के नाम पर उन्होंने 8 लाख रुपये की अवैध मांग की और विरोध करने पर गाली-गलौज व धमकी दी। व्यापारी ने इस मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है।
इस्तीफे के बाद बढ़ा विवाद–
प्रशांत कुमार ने मंगलवार दोपहर अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा था कि वे शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत हैं और सीएम योगी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। इस्तीफे के बाद वे भावुक होकर अपनी पत्नी से फोन पर बात करते हुए रो भी पड़े थे।
शाम को सीडीओ समेत कई अधिकारी उनसे मिलने पहुँचे और करीब पाँच घंटे चर्चा चली।
पुरानी शिकायतें भी सामने आईं—बहन का नाम भी शामिल-
प्रशांत के भाई द्वारा वर्ष 2021 में की गई शिकायत में न केवल प्रशांत बल्कि उनकी बहन जया सिंह का नाम भी शामिल है। यह पत्र मऊ के सीएमओ द्वारा डीजी मेडिकल & हेल्थ सर्विसेज, लखनऊ और स्टेट मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष को भेजा गया था।
इसमें दिव्यांगता प्रमाणपत्र की पुनः जांच का अनुरोध किया गया था, जो अब तक लंबित चला आ रहा था।
जांच अब तेज—अधिक गिरफ्तारियों की संभावना–
मामला मीडिया में आने के बाद विभाग ने रफ्तार पकड़ ली है। सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग से प्रमाणपत्र की तकनीकी जांच कराई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया तो प्रशांत कुमार पर न केवल बर्खास्तगी, बल्कि आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट अयोध्या
Author: Adv Vinod Kumar
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