न्यूज़ 21 भारत लखनऊ
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।मायावती के बाद बहुजन समाज पार्टी कौन संभालेगा, ये मायावती ने साफ कर दिया है। यह घोषणा रविवार, 10 दिसंबर को हुई है।
बता दें कि बसपा प्रदेश पदाधिकारियों और जिले के नेताओं की विशेष बैठक रविवार को आमंत्रित की गई थी। मायावती ने बैठक में इस बड़ी घोषणा के साथ हर किसी को हैरान कर दिया है। माना जा रहा था कि बसपा मायावती की अगुआई में लोकसभा चुनाव लड़ेगी। हालांकि मायावती ने पहले ही बसपा के अकेले दम पर देश के आम चुनाव में उतरने का ऐलान कर दिया था।
आकाश आनंद पहले भी निभा चुके है अहम जिम्मेदारी
आपको बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती आज अपने भतीजे आकाश आनंद के साथ लखनऊ की पार्टी मीटिंग में पहुंची थीं। इसी मीटिंग में मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान कर दिया। आकाश आनंद पिछले 6 साल से राजनीति में हैं। वे तब से लगातार सक्रिय बने हुए हैं।इससे पहले मायावती, आकाश आनंद को बीएसपी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंप चुकी हैं। आकाश आनंद कई बार अलग-अलग राज्यों में जाकर पार्टी पदाधिकारियों की मीटिंग कर चुके हैं। इसके अलावा खुद अकेले जाकर कई सभाओं को भी संबोधित कर चुके हैं। राजस्थान चुनाव से पहले उन्होंने पदयात्रा भी की थी।
आकाश आनंद की क्या है शिक्षा दीक्षा
आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं । आकाश आनंद की स्कूलिंग हरियाणा के गुरुग्राम में हुई है। स्कूलिंग के बाद पढ़ाई के लिए आकाश आनंद लंदन चले गए थे। आकाश आनंद ने लंदन से एमबीए किया है। आकाश आनंद पहली बार 2017 में मायावती यानी अपनी बुआ के साथ राजनीतिक मंच पर दिखाई दिए थे। मायावती ने बड़ी रैली करके आकाश आनंद को लॉन्च किया था।
मायावती ने क्यों सौपी भतीजे को कमान
गौरतलब है कि आकाश आनंद को बीएसपी का उत्तराधिकारी बनाकर मायावती ने सियासत में नई बहस छेड़ दी है। यूपी में सिमटती बीएसपी के लिए सियासी पंडित नए सिरे से अनुमान लगाने लगे हैं। आकाश आनंद एक युवा हैं। वह पार्टी के लिए सड़क से संसद तक की लड़ाई लड़ सकते हैं।आकाश आनंद बीएसपी और पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर सकते हैं। आकाश आनंद से बीएसपी और मायावती को काफी उम्मीदें हैं।
विरोधियो के रडार पर आ सकती है पार्टी
हालांकि, विरोधी मायावती पर परिवारवाद की पॉलिटिक्स करने और बीएसपी के दिग्गज अनुभवी नेताओं को दरकिनार करने का आरोप लगा सकते हैं। वे सवाल उठा सकते हैं कि क्या सिर्फ परिवार का होने की वजह से आकाश आनंद को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है? या फिर आकाश आनंद सच में पार्टी की जिम्मेदारियों को अच्छे से संभाल पांएंगे।अब यह देखना दिलचस्प होगा की क्या वह यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में महज 1 सीट पाने वाली बीएसपी को राज्य और देश के अलग-अलग राज्यों में पार्टी के खोये हुए जनाधार को बढ़ा पाएंगे।